एयर क्वालिटी इंडेक्स क्या है- Air Quality Index (AQI) कैसे काम करता है

वर्तमान समय में पुरी दुनिया में ज्यादातर देशों की वायु काफी ज्यादा प्रदूषित है ऐसे में सभी देश वायु प्रदूषण की बढ़ती समस्याओं और स्वास्थ्य संबंधित परेशानियों से जूझ रहे हैं और इसका सबसे बड़ा उदाहरण वैश्विक समाज है जो की एक चुनौती के तौर पर उभरा है यदि देखा जाए तो विश्व की लगभग 90% से अधिक जनसंख्या आज भी प्रदूषित वायु में सांस लेने के लिए विवश है ऐसा नहीं है की इसे सुधारने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया जबकि कई देशों ने वैश्विक स्तर पर इसकी रोकथाम के लिए कई उपाय किए परंतु आज भी अधिकांश आबादियों को यह प्रभावित करने में अग्रसर रहा है भारत को ही देख लीजिए जहां पर राजधानी दिल्ली पिछले कई वर्षों से एयर क्वालिटी इंडेक्स(AQI) सबसे खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है |

Table of Contents

Air Quality Index (AQI) Kya Hai?

एयर क्वालिटी इंडेक्स को वायु गुणवत्ता सूचकांक भी कहा जाता है।यह हवा की गुणवत्ता को मापने का एक प्रकार का पैमाना होता है जो की Air की Quality को व्यवस्थित रूप से मापने के लिए बनाया गया है वर्तमान समय में विश्व के विभिन्न देशों ने संकेतक कैसे काम करता है? वायु की गुणवत्ता को मापने के लिए Air Quality Index (AQI) का निर्माण किया है जिसमें हवा में मौजूद 8 प्रदूषको जैसे NO2, SO2, CO, O3, NH3, Pb और PM10, PM2.5 की मात्रा को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तय किए गए मापदंडों के अनुसार सूचीबद्ध करने का कार्य किया गया है। वर्तमान समय में AQI को छह कैटिगरी में बाटा गया है जो की अच्छी, संतोषजनक, थोड़ा प्रदूषित, खराब l,बहुत खराब और गंभीर है।

Air Quality Index

Air Quality Index Table

Sr.NoAQI RangeRating
10 से 50अच्छा
251 से 100संतोषजनक
3101 से 200थोड़ा प्रदूषित
4201 से 300खराब
5301 से 400बहुत खराब
6401 से 500गंभीर

वायु का प्रदूषित होने का मुख्य कारण क्या है?

  • जब हवा की गति में कमी आती है तो संकेतक कैसे काम करता है? ऐसे Smog बनने लगता है जिससे सामने का सब कुछ धुंधला धुंधला दिखाई देता है।
  • किसी भी त्यौहार पर पटाखे फोड़ने से उसका धुआं वायु में जाकर घुल जाता है ऐसे में वायु प्रदूषित होने लगती है।
  • आज भी ग्रामीण क्षेत्र में खेतों में पराली जलाई जाती है जिसकी वजह से वायु प्रदूषण बढ़ता है।
  • वाहनों, कारखाने के द्वारा निकलने वाले धुएं से प्रदूषण में अत्यधिक वृद्धि देखने को मिलती है।
  • धूल की मात्रा अत्यधिक होने में हवा दूषित हो जाती है।।

Air Quality Index

PM 2.5 & PM 10 क्या है?

पीएम का जो फुल फॉर्म होता है वह Particulate Matter होता है जिसे कण प्रदूषण के नाम से भी जाना जाता है जब 2.5 माइक्रोमीटर वाले कण हवा में घुलते है तो उसे PM 2.5 और जब 10 माइक्रोमीटर वाले कण हवा में घुलते है तो उसे PM 10 की श्रेणी में रखा जाता है। यह वातावरण के अंतर्गत मौजूद ठोस कण और तरल बूंद के मिश्रण से बनता है और यह इतने सूक्ष्म होते हैं की इन्हें नंगी आंखों से देखना नामुमकिन होता है इसलिए इसको देखने के लिए Electron Microscope का सहारा लिया जाता है और दिल्ली जैसे शहरों में बढ़ रहे वायु प्रदूषण में सबसे ज्यादा मात्रा पीएम 2.5 और पीएम 10 कणों की देखी गई है जब इनका स्तर पर्यावरण में अधिक मात्रा में बढ़ने लगता है तो लोगों को सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

Air Quality Index कैसे काम करता है?

विश्व के सभी देशों में एयर क्वालिटी इंडेक्स जो होता है वह प्रदूषण कारकों के आधार पर विभिन्न विभिन्न प्रकार का होता है यदि भारत में इसकी व्याख्या की जाए तो यह Ministry Of Environment, Forest & Climate Change के द्वारा लॉन्च किया गया है जो की एक संख्या, एक रंग, एक विवरण के आधार पर संचालित होता है जैसा की हम सब जानते हैं की वर्तमान समय में भारत की आधे से ज्यादा आबादी जो है वह शिक्षित नहीं है इस वजह से उन्हें प्रदूषण की गंभीरता समझाने के लिए सरकार को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है इस वजह से उन्हें समझाने के लिए रंगों का इस्तेमाल किया जाता है

जो की रीडिंग के आधार पर 6 Category में बांटे गए हैं जिसके बारे में हमने आपको उपरोक्त बताया है यदि 0 से 50 के बीच AQI है तो वह अच्छा,51 से 100 के बीच संतोषजनक, 101 से 200 के बीच थोड़ा प्रदूषित,201 से 300 के बीच खराब, 301 से 400 के बीच बेहद खराब और 400 से 500 के बीच गंभीर की श्रेणी में रखा गया है। इस प्रकार से देश में Air Quality Index (AQI) को व्यापक तौर पर कार्य करना होता है।

Cost Inflation Index: यह कैसे काम करता है और कैसे टैक्स बचाने में मददगार है

Cost Inflation Index: यह कैसे काम करता है और कैसे टैक्स बचाने में मददगार है

डीएनए हिंदी: केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने 14 जून को लागत मुद्रास्फीति सूचकांक (CII) के आंकड़े जारी कर दिए हैं. आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2022-23 में सीआईआई अब बढ़कर 331 हो गया है, जबकि वित्त वर्ष 2021-22 में यह 317 था, जो सालाना आधार पर उपभोक्ता वस्तुओं और संपत्ति की कीमतों में 4.42% की वृद्धि है. लागत मुद्रास्फीति सूचकांक (CII) वार्षिक आधार पर वस्तुओं और संपत्तियों की औसत कीमतों में बदलाव के बारे में जानकारी देता है. सीआईआई मूल्य का उपयोग परिसंपत्ति के अधिग्रहण की मुद्रास्फीति-समायोजित लागत का पता लगाने के लिए किया जाता है. यही कारण है कि सीआईआई टैक्स प्लानिंग में बहुत महत्वपूर्ण है. यह पूंजीगत लाभ के निर्धारण में एक संकेतक कैसे काम करता है? प्रमुख भूमिका निभाता है.

CII कैसे काम करता है?

कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (सीआईआई) के जरिए यह तय किया जाता है कि किसी प्रॉपर्टी या एसेट की बिक्री पर हुए प्रॉफिट पर आपको कितना कैपिटल गेन टैक्स देना होगा.

लागत मुद्रास्फीति सूचकांक का इस्तेमाल कैसे किया जाता है?

सीआईआई का इस्तेमाल रियल एस्टेट (real estate), गोल्ड ज्वैलरी (gold jewelry), डेट म्यूचुअल फंड (debt mutual funds) आदि सहित निवेश और संपत्ति के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) की गणना के लिए किया जाता है. सीआईआई के मूल्य के साथ, आप किसी संपत्ति की बिक्री पर वास्तविक लाभ जान सकते हैं. CII का उपयोग किसी परिसंपत्ति की मुद्रास्फीति-समायोजित लागत मूल्य की गणना करने के लिए किया जाता है. लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ या हानि (Long-term capital gains) की गणना मुद्रास्फीति-समायोजित मूल्य का उपयोग करके की जाती है.

हालांकि, CII का इस्तेमाल इक्विटी शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड पर लाभ के लिए नहीं किया जा सकता है. दरअसल इसपर बिना किसी इंडेक्सेशन लाभ के 10% की दर से कर लगाया जाता है.

जब आप कोई पूंजीगत संपत्ति या संपत्ति बेचते हैं, तो आपको पूंजीगत लाभ कर का भुगतान करना पड़ता है. यह कर बिक्री मूल्य और खरीद मूल्य के बीच के अंतर पर लगाया जाता है. संपत्ति का मूल्य समय के साथ बढ़ता है. इस वजह से इसकी बिक्री भी अधिक कीमत पर की जाती है.

इससे बिक्री मूल्य और लागत मूल्य के बीच का अंतर बढ़ जाता है. लेकिन, जैसे-जैसे संपत्ति का मूल्य समय के साथ बढ़ता है, वैसे ही मुद्रास्फीति के कारण पैसे का मूल्य भी बढ़ता रहता है. CII कृत्रिम रूप से आपकी संपत्ति या संपत्ति के लागत मूल्य को बढ़ा देता है. इससे बिक्री मूल्य और लागत मूल्य के बीच का अंतर कम हो जाता है. यह पूंजीगत लाभ कर को भी कम करता है. यही कारण है कि टैक्स प्लानिंग के लिए सीआईआई बहुत महत्वपूर्ण है.

अधिग्रहण की Index Cost

आयकर विभाग निर्धारिती को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स की गणना के लिए अधिग्रहण की अनुक्रमित लागत को ध्यान में रखने की अनुमति देता है. उदाहरण के लिए, आपको किसी संपत्ति के हस्तांतरण संकेतक कैसे काम करता है? पर हुए लाभ पर पूंजीगत लाभ कर का भुगतान करना होगा. अगर कोई व्यक्ति इसे खरीद के दो साल पहले बेचता है, तो इससे होने वाले लाभ को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) माना जाता है.
STCG को व्यक्ति की आय में जोड़ा जाता है. फिर उस पर व्यक्ति के टैक्स-स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है. यदि कोई व्यक्ति संपत्ति को दो साल से अधिक समय तक रखने के बाद बेचता है, तो उसके द्वारा किए गए लाभ को दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ माना जाता है. इस पर इंडेक्सेशन के साथ 20% टैक्स लगता है. किसी संपत्ति के LTCG की गणना करने के लिए, संपत्ति के अधिग्रहण की अनुक्रमित लागत की गणना करनी होती है.


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Network Readiness Index, नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स क्या है, और इसमें भारत का रैंक क्या है

Network Readiness Index : भारत नेटवर्क रेडीनेस रिकॉर्ड्स साल 2022 का इंडेक्स जारी किया गया है, जिसमें भारत ने 61 वां स्थान बनाया है। जारी किए गए इस नेटवर्क रेडीनेस राशि n.r.i. 2022 में भारत 6 जगहों पर जा रहा है। यह पूरे विश्व की 131 अर्थव्यवस्थाओं के नेटवर्क आधारित रेडीनेस परिदृश्य को स्पेसिफाई करता है। केंद्रीय संचार मंत्रालय ने इस बात की जानकारी दी है। अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और विशेषज्ञ मार्गदर्शन की तलाश कर रहे हैं, तो आप हमारे जनरल अवेयरनेस ई बुक डाउनलोड कर सकते हैं FREE GK EBook- Download Now. / सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इस ऐप से करें संकेतक कैसे काम करता है? फ्री में प्रिपरेशन - Safalta Application

नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स का मानाक क्या है


नेटवर्क रेडीनेस 2022 को तैयार करने में टेक्नोलॉजी, गवर्नेंस एवं उन देशों के लोगों को शामिल किया गया है। इसमें पूरे देश के लोगों को शामिल किया है, इस इंडेक्स में टेक्नोलॉजी, गवर्नेंस सहित 58 वेरिएबल को खबर करने वाले प्रभाव को भी शामिल किया गया है। Free Daily Current Affair Quiz-Attempt Now with exciting prize


रैंकिंग में भारत का परफॉर्मेंस क्या था


इस रैंकिंग में भारत ने अपने पिछले 6 अंक का सुधार किया है, साल 2021 में भारत का स्थान 49.74 था जो कि इस बार बढ़कर 51.19 गया है।
इंडेक्स में भारत की पोजीशन के बारे में बात करें तो दूसरे देशों से आगे है। जो सरकार की लक्ष्यों को सही पक्का करता है, जो सरकार की नीतियों एवं योजनाओं को सही ठहराते हैं।
इस इंडक्शन में भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में पहला स्थान हासिल किया है।
मोबाइल ब्रॉडबैंड इंटरनेट, बैंडविड्थ में भारत ने दूसरा स्थान बना लिया है।
भारत इस इंडेक्स में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है संकेतक कैसे काम करता है? और टेलीकम्युनिकेशन सर्विस में एनुअल इन्वेस्टमेंट के मामले में तीसरा स्थान बनाया है।
भारत में आईसीटी सेवा निर्यात में चौथे स्थान एवं एआई वैज्ञानिक प्रकाशन में पांचवा स्थान बनाया है।

नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स 2022 के टॉप 5 देश कौन से हैं

रैंक देश स्कोर
1. यूएसए 80.30
2. सिंगापुर 79.35
3. स्वीडन 78.91
4. नीदरलैंड 78.82
5. स्विटजरलैंड 78.45

नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स क्या है


नेटवर्क संकेतक कैसे काम करता है? रेडीनेस इंडेक्स में देश को के चार ग्रुप में बांटा गया है जिसके तहत इंडेक्स को रैंक करते हुए तैयार किया जाता है। इन कैटेगरी में हाई इनकम कंट्रीज, अपर मिडिल इनकम कन्ट्रीज, लो इनकम कंट्रीज, को बांटा गया है।


नेटवर्क कैसे काम करता है

नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स को तीन स्तर के साथ तैयार किया जाने वाला एक कोम्पोजिट इंडेक्स है। प्राइमरी लेवल के चार पिलर होते हैं जो नेटवर्क कांसेप्ट के मूलभूत आयाम को तैयार करने का काम करते हैं। इनकी मदद से दूसरे स्तर के डाटा को तैयार किया जाता है और तीसरे लेवल में प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तरों के विभिन्न रूप स्तंभों में व्यक्तिगत संकेतक को शामिल किया गया है

तय हो गया संकेतक कैसे काम करता है? इस साल का Cost Inflation Index, आखिर कैसे काम करता है ये और टैक्‍स बचाने में कितना मददगार

कैपिटल गैन्‍स के निर्धारण में CII की मुख्‍य भूमिका होती है. स

टैक्‍स प्‍लानिंग में सीआईआई (Cost Inflation Index) का बहुत महत्‍व है. कैपिटल गैन्‍स के निर्धारण में इसकी मुख्‍य भूमिका . अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
  • Last Updated : June 17, 2022, 14:40 IST

नई दिल्‍ली. वार्षिक आधार पर गुड्स और एसेट्स की औसतन संकेतक कैसे काम करता है? कीमतों में इनफ्लेशन या डिफ्लेशन की वजह से हुए बदलाव की जानकारी देने वाले कॉस्‍ट इनफ्लेशन इंडेक्‍स (CII) का डेटा अब आ चुका है. केंद्रीय प्रत्‍यक्ष कर बोर्ड (CBDT) द्वारा 14 जून को जारी डेटा से पता चलता है कि वित्‍त वर्ष 2022-23 में सीआईआई अब बढ़कर 331 हो चुका है जबकि वित्‍त वर्ष 2021-22 में यह 317 था. इस तरह वार्षिक आधार पर कंज्‍यूमर गुड्स और एसेट्स की कीमतों में 4.42 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

एसेट की इनफ्लेशन-एडजस्टेड कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन जानने के लिए सीआईआई वैल्‍यू का इस्तेमाल किया जाता है. यही वजह है टैक्‍स प्‍लानिंग में सीआईआई का बहुत महत्‍व है. कैपिटल गैन्‍स के निर्धारण में इसकी मुख्‍य भूमिका होती है. सीआईआई से ही निर्धारित किया जाता है कि किसी प्रॉपर्टी या एसेट को बेचने पर हुए मुनाफे पर आपको कितना कैपिटल गेन्‍स टैक्‍स चुकाना होगा.

ऐसे होता है सीआईआई का उपयोग

मनीकंट्रोल डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के अनुसार सीआईआई का इस्तेमाल रियल एस्टेट, गोल्ड सहित इनवेस्टमेंट्स और एसेट के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्‍स (LTCG) के कैलकुलेशन के लिए किया जाता है. CII की वैल्यू से आप किसी एसेट की सेल पर हुए रियल गेन को जान सकते हैं. जब आप कैपिटल एसेट या प्रॉपर्टी बेचते हैं तो आपको कैपिटल गैन्‍स टैक्‍स देना होता है. यह टैक्‍स बिक्री मूल्‍य और खरीद मूल्‍य के अंतर पर लगता है.समय के साथ किसी प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ जाती है. इस वजह से उसकी बिक्री भी ज्‍यादा कीमत पर होती है. इससे सेल प्राइस और कॉस्‍ट प्राइस में अंतर बढ़ जाता है. लेकिन, ज्‍यों-ज्‍यों समय के साथ प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ती है, वैसे ही इनफ्लेशन के कारण पैसे की वैल्‍यू भी गिर जाती है.

इसलिए अब अगर आप उसी प्रॉपर्टी को खरीदते हैं तो आपको ज्‍यादा दाम देने होंगे. इस इनफ्लेशन के चलते आपका असल गेन उतना नहीं होता है जितना दिखता है. आपका गेन मार्केट प्राइस में हुई बढ़ोतरी है, जिस पर आपको टैक्स चुकाना होता है. करदाताओं को राहत देने के लिए सरकार इनफ्लेशन के इस बेनेफिट का लाभ टैक्‍सपेयर को CII के जरिए देती है. सीआईआई कृत्रिम रूप से आपकी प्रॉपर्टी या एसेट का कॉस्ट प्राइस बढ़ा देता है. इससे सेल प्राइस और कॉस्ट प्राइस में अंतर कम हो जाता है. इससे कैपिटल गेन्‍स टैक्स घट जाता है. यही कारण है कि टैक्स प्लानिंग के लिए सीआईआई बहुत जरूरी है

इंडेक्स्ड कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन

लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन्‍स (LTCG) टैक्स की गणना कके लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट एसेसी को इंडेक्स्ड कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन को ध्यान में रखने की इजाजत देता है. उदाहरण के लिए किसी प्रॉपर्टी के ट्रांसफर पर होने वाले गेंस पर आपको कैपिटल गेंस टैक्स चुकाना होता है. अगर कोई व्यक्ति खरीदने के दो साल के पहले बेच देता है तो उससे हुए गेन्‍स को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्‍स (STCG) माना जाता है.

एसटीसीजी को व्यक्ति की आय में जोड़ दिया जाता है. फिर इस पर व्यक्ति के टैक्स-स्लैब के हिसाब से कर लगता है. अगर व्यक्ति प्रॉपर्टी दो साल से ज्यादा समय तक रखने के बाद बेचता है तो उसे हुए लाभ को लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन्‍स माना जाता है. इस पर इंडेक्सेशन के साथ 20 फीसदी टैक्स लगता है. प्रॉपर्टी के LTCG को कैलकुलेट करने के लिए व्यक्ति को प्रॉपर्टी के इंडेक्स्ड कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन की गणना करनी होती है.

ऐसे होती है गणना

इसके लिए प्रॉपर्टी या एसेट की सेल जिस साल होती है उस साल की संकेतक कैसे काम करता है? सीआईआई वैल्‍यू को कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन से गुणा किया जाता है. फिर इसमें जिस साल प्रॉपर्टी खरीदी गई थी, उस साल की सीआईआई वैल्‍यू से विभाजित (Divide) किया जाता है. मान लीजिए आपने 2010-11 में एक घर 50 लाख रुपये में खरीदा था. आपने इसे 2020-21 में एक करोड़ रुपये में बेच दिया. इसका इंडेक्स्ड कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन कैलकुलेट करने के लिए आपको 2010-11 और 2020-21 की सीआईआई वैल्‍यू जाननी होगी.

यह आपको आयकर विभाग की वेबसाइट पर मिलती है. प्रॉपर्टी खरीदने के साल में सीआईआई 167 था. प्रॉपर्टी बेचने के साल में यह 301 हो गया. इस तरह इस प्रॉपर्टी का इंडेक्स्ड कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन 90,11,976 [50,00,000 x (301/167)] होगा. इस तरह आपका LTCG ₹9,88,023 (1,00,00,000 – 90,11,976) होगा. इस अमाउंट पर आपको LTCG चुकाना होगा.

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IC15: भारत का पहला Cryptocurrency Index लॉन्च, जानें क्या है ये और कैसे करता है काम

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ग्लोबल क्रिप्टो सुपर एप्लीकेशन CryptoWire ने भारत का पहला cryptocurrencies इंडेक्स IC15 लॉन्च किया है. ये इंडेक्स दुनिया से सबसे अधिक ट्रेड होने वाली cryptocurrencies की परफॉर्मेंस को ट्रैक करेगा.

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आपको बता दें कि TickerPlan का स्पेशल बिजनेस यूनिट CryptoWire है. पिछले कुछ सालों में क्रिप्टोकरेंसी एसेट्स बन कर उभरा है. इसे ज्यादा लोग स्वीकार संकेतक कैसे काम करता है? कर रहे हैं और इसकी लोकप्रियता भी काफी बढ़ रही है.

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ये इंडेक्स 80 परसेंट मार्केट मूवमेंट को कैप्चर करता है. ये फंडामेंटल मार्केट ट्रैकिंग और एसेसिंग टूल है जो डिसीजन पर बेस्ड है और ट्रांसपेरेंसी को बढ़ाता है. CryptoWire की इंडेक्स गवर्नेंस कमिटी जिसमें डोमेन एक्सपर्ट्स, इंडस्ट्री प्रैक्टिसनर शामिल होंगे, वो इंडेक्स को मेटेंन, मॉनिटर और एडमिनिस्ट्रेट करेंगे. इसे प्रत्येक तिमाही में रिबैलैंस किया जाएगा.

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IC15 में Bitcoin, Ethereum, XRP, Bitcoin Cash, Cardano, Litecoin, Binance Coin, Chainlink, Polkadot, Uniswap, Dogecoin, Solana, Terra, Avalanche और Shiba Inu शामिल होंगे.

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मुंबई-बेस्ड कंपनी IC15 को क्रिप्टो माइनिंग के इनसाइट को प्रोवाइड करने के लिए डिजाइन किया गया है. ये क्रिप्टो मार्केट का सही बेंचमार्क भी यूजर्स को देगा. इस संकेतक कैसे काम करता है? इंडेक्स से इनवेस्टर्स और इनवेस्टमेंट मैनेजर्स क्रिप्टोकरेंसी की ग्लोबल मार्केट परफॉर्मेंस पर नजर रख पाएंगे.

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आपको बता दें कि क्रिप्टोकरेंसी का चलन भारत में भी खूब बढ़ा है. कई प्लेटफॉर्म के जरिए इसमें लोग इनवेस्ट कर रहे हैं. हालांकि, सरकार इस पर बिल लाने वाली थी लेकिन इस संसद सत्र में क्रिप्टो बिल को पेश नहीं किया गया.

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